Ek Sawaal...
सूरज है, चाँद है प्यास है, पानी है, जिंदगी है पर सुकून नहीं और इस जहाँ में जिनके पास सुकून है, उनकी पलकें फिर क्यूँ नम हैं? धुप है, छाँव है, इंसान है, इश्वर है दिल है पर प्यार नहीं और इस जहाँ में जिनके पास प्यार है, उनकी पलकें फिर क्यूँ नम हैं? कलम है, कागज़ है लब हैं, बोल हैं, नज़र है पर द्रष्टि नहीं और इस जहाँ में जिनके पास द्रष्टि है उनकी पलकें फिर क्यूँ नम हैं?