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MaIn AdHuRa Hu....

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मैं कहाँ से पूरा हूँ, जिनके साथ हस्ता, पड़ता, खेलता, रोता, आज उन सब के बिना, मैं अधूरा हूँ छत की जिस मुंडेर  पर बैठकर, उड़ते पंछियों को ताकता, जिस पर खड़े होकर अपने आपको सबसे ऊंचा पाता, दोस्तों को पुकारता, आज उस  मुंडेर  के बिना, मैं अधूरा हूँ सुबह सुबह प्रयेर से पहले स्कूल में होने वाली मस्ती, फिर इंटरवल का इंतज़ार और वो छुट्टी में बजने वाली घंटी की आवाज़, आज उस आवाज़ के बिना, मैं अधूरा हूँ बरसात में खेलने की मस्ती, बहार मिटटी में बहते पानी में कागज़ की कश्ती वो खुबसूरत नज़ारा, आज उस नज़ारे के बिना   मैं अधूरा हूँ कहाँ फस गया समझदारी के  इस भंवर में वो खेलता कूदता नादान बचपन  ही प्यारा था, आज उस बचपन के बिना मैं अधूरा हूँ....!!     

Ek Sawaal...

सूरज है, चाँद है प्यास है, पानी है, जिंदगी है पर सुकून नहीं और इस जहाँ में जिनके पास सुकून है, उनकी पलकें फिर क्यूँ नम हैं? धुप है, छाँव है, इंसान है, इश्वर है दिल है पर प्यार नहीं और इस जहाँ में जिनके पास प्यार है, उनकी पलकें फिर क्यूँ नम हैं? कलम है, कागज़ है लब हैं, बोल हैं, नज़र है पर द्रष्टि नहीं और इस जहाँ में जिनके पास द्रष्टि है उनकी पलकें फिर क्यूँ नम हैं?

कुछ पल इनके लिए...

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जीना  है तो इनके लिए जियो करना है तो कुछ इनके लिए करो ज़िन्दगी न मिलेगी दुबारा इनसे जी भर कर प्यार करलो! स्नेह की जरूरत है इन्हें कुछ दिल दारों की जरूरत है इन्हें,   अपने आगे पीछे मुस्कुराते चहरों की जरूरत है इन्हें आपकी जरूरत है इन्हें!!   अपनी मंजिल इन्हें नहीं पता रहा पर चलना इन्हें नहीं आता मासूम भरे नैनो से, पलकों पर लिए कुछ  जानी अनजानी पानी की बूँदें,                                ढून्ढ रहे हैं अपने अपनों को, लड़ रहे हैं अपने आपसे,  इस कुदरत से, बिना कुछ बोले किसी को!! थामे इन मासूमो का हाथ,  चलें चंद कदम इनके साथ, दें इन्हें कुछ लहमे ख़ुशी के, दिलाएं इन्हें, इनके होने का एहसास, ज़िन्दगी के कुछ पल इनके लिए जीलें...!! 

Tera Mera Mann...

झिलमिलाते तारों की चादर के नीचे  खोया है अपनी ही धुन में, काले होते दिए में, सोचते सर खुजलाते  एक बूंद में समाये पूरे संसार को समझने  की कोशिश!!! चार बाशिंदों में अंतर खोजने की चाह में, आँखों में नींद का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे खुमार को, पलकों को मीचते मसलते बड़ी मासूमियत  से जाने के लिए कह रहा है!!! अपनों का प्यार पाने की ख़ुशी और खोने  का गम,क्यूँ होता है, जान्ने पहचान्ने में लगा है!! लालच पर काबू क्यूँ नहीं,  दिल में जज्ज्बात क्यूँ नहीं, क्यूँ भूल जाता है कोई की उसकी असली  मंजिल है कहाँ, बिना एक कौड़ी लिए इस बूंद में से निकलकर उसे भी जाना है वहां!!! इतना सोचते, समझते जाने कब चाँद की चांदनी ने करवट लेली,  सूरज की किरणों ने अपनी जगमगाहट से तारों की  झिलमिलाहट छुपाली…!!!

Kismat...

कहालती हूँ मैं किस्मत,  मेरे अपने हैं नियम, किसी को देती हूँ ख़ुशी तो किसी पर करती हूँ सितम, रुतवा है ऐसा मेरा, की हर तरफ होती चर्चा मेरी, अपनी मेहनत को छोड़ मुझ पर अंध विश्वाश करती है ये दुनिया पूरी  कहालती हूँ मैं किस्मत,  जिसपर मैं हुई मेहरबान उसपर दुनिया वाले हर पल देने को हैं तैयार अपनी जान, रंक से राजा और राजा से रंक बनाना, ऐसा है मेरा काम, कहलाती हू मैं किस्मत किस्मत होती तो ये होता, किस्मत होती तो वो हो जाता,  हुजुर  जो बात हवा में है, सागर की मचलती लहरों में है वोही बात मुझ मैं है, जिसके साथ चाहती, उसके संग होलेती, सच कहूँ तो वो बड़ी किस्मत वाला है जिसकी तकदीर मुझसे टकरा जाती, क्यूंकि ज़िन्दगी भर दौड़ते रहते हैं लोग मेरे पीछे, पर मैं हाथ नहीं आती हर किसी के इस्सिलिये,  कहालती हूँ मैं किस्मत!

Alfaaz...

सोचा की कुछ लिखु, कुछ खुबसूरत अल्फ़ाज़ों के अनमोल मोतियों को, एक धागे में पिरोयुं, सुना है की इन मोतियों का आज के जमाने में खेल बड़ा ही निराला है, ये जिनकी जुबान से सच बनके गिरते हैं, उनसे सब कुछ छीनलेते हैं, और जिनकी जुबान से झूठ बनके गिरते हैं, उन्हें छप्पड़ फाड़कर देते हैं, ये तो अपने समझने समझने की बात है, इसमें हम इन अल्फाजों को क्यूँ कसूरवार थराएं, इन्ही की बदोलत आज मैं दो वक़्त का खाना चैन से खा रहा हु, और अपनी सोच को इन्ही मोतियों के हवाले से आप  तक पहुंचा रहा हु, खेर धागे में पिरोते पिरोते  मैंने  पाया की, ये एक अफवाह भी बने और कहावत भी, खबर भी बने और खुबसूरत नगमा भी,   झगडा भी बने और प्रतिज्ञा भी, आदेश भी बने और आखिर में मेरा सन्देश...

छोटे बड़े पुल...

फासलों  को  कम  करते  हैं,   ये  बनजाते  अन्जाने  में  ही महफूज़!! धुप  में, आंधी में, वर्षा में, शीत में,  तपते हैं, भीगते हैं, पर सीना तान खड़े रहते   अपने हर मुसाफिर  को  उसकी  मंजिल  तक  पंहुचा  ते  हैं!!! ये  छोटे बड़े पुल, कहने को तो निर्जीव हैं लेकिन न जाने कितनो  के खून-पसीने की बूंदों और दिन रात की मेहनत को  अपने आगोश में लिए हुए है!! कितनो की न जाने इसी पुल ने दो वक़्त की रोटी दाल से भूख मिटाई है!!! ये छोटे बड़े पुल थके हारे राहगीरों को अपने आलिंगन में लेकर उन्हें एक  नयी उर्जा और उत्साह के साथ रवाना करते हैं, एक माँ का बेटा,  बच्चों की मुस्कराहट “खिलोने”,  पति का प्यार कुछ ही पलों में अपनों तक पहुचाते हैं!!! ये छोटे बड़े पुल   हमारी...

Sab Dhoka hai...

कहते हैं मेहनत का फल मिलता है,  लेकिन आज के दौर में ऐसा सोचना मतलब, अपने आप को देना धोका है….!! 365 दिन का हर पल चुनोतिपूर्ण होता है , और उसका हस कर सामना करने के बाद  जो मिलता है, वो एक धोका है….!! दिन भर का प्रयास, आने वाले समय के लिए तर्रक्की समझता हु, कल की अपनी ताकत समझता हु, और उसका परिणाम देख कर,  टूटते हैं सपने, छलक ते हैं आंसू और नज़र आता सिर्फ धोका है…!! इस दुनिया में अपनी मेहनत पर विश्वास होता है, लेकिन पल भर में, मैं उस विशवास को टूट ते देखता हु, दुनिया वालों को मुहं फेरते देखता हु, जो ये एहसास दिला जाता है, की आज की दुनिया ही  एक दोखा है..!!

Har Ghadi...

हर घडी  बस  तेरा  ही  एहसास  है, तेरा  ही  खुमार  है चाहत तेरी दिल मेरा... तेरी मोहब्बत में  मेरी जान कुर्बान है..!! हर घडी  बस अब तेरी ही याद है, वो गुज़रा लह्म साथ है आँखें तेरी आंसूं मेरे... तेरे इश्क में मेरी जान कुर्बान है..!! हर घडी बस अब तेरा ही नशा है, तेरे साथ हर पल जीने की चाह है सपने तेरे खुशनसीबी मेरी  तेरे प्यार में मेरी जान कुर्बान है..!!