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जीना चाहती हूँ मैं...

जीना चाहती हूँ मैं, जीने दो  मुझे आज मुस्कुराने दो… मोहब्बत में ही तो ज़िन्दगी का नशा, दुआ ही तो बेंतेहा दर्द की दवा है... मुझसे ही तो तेरा अस्तिव, तुझसे ही तो ये जहाँ है। करती हूँ मैं जो, करने दो मुझे आज कुछ कह जाने दो... शबनम की डाली पर बैठकर हवा के चंचल झोंको से गुफ्तगू करनी है... शमा की मुस्कान से मिलकर    एक दिलकश अफ़साने से खुबसूरत दामिनी को मिलना है।  जीना चाहती हूँ मैं, तकलीफों के दरिया,  हैवानियत के समुन्द्र  को इसी जन्म में अलविदा कह,   कहीं और जाना चाहती हूँ मैं।  जाना चाहती हूँ मैं,जाने दो, मुझे आज नए सफ्फर पर निकल जाने दो… एक बार फिर बचप्पन की क्यारी में छुपकर  आँगन में पड़ी मिटटी को जीब से लगानी है,  माँ की डांट के फूलों के बगीछों से  फिर नादान ख़्वाबों के परिंदों पर बैठकर उड़ना है। जीना चाहती हूँ  मैं ,जीने दो   मुझे आज कहीं और मुस्कुराने दो।।।। 

Jeetega Tu...

जीतेगा तू, यूँ न अपने ख्वाबो को तोड़ यूँ न अपनी किस्मत को कोस करना है कुछ अगर, तो दुश्मन की हड्डी मरोड़!! दे पटकनी मार दांव, ख़्वाबों में था जो तेरे आज हकीकत में तू वो कर दाल!! जीतेगा तू,  क्यूँ तेरा मन्न है थका थका क्यूँ तू नज़र आ रहा है जुदा जुदा उठा अपनी पलकें देख, करोड़ो के लबों पर है तेरे लिए दुआ दुआ, सटीकता है तेरे वार में, जिसे लाना है बस तुझे अपने विश्वास में देश की इज्ज़त लगी है साख पर, अब सब कुछ है तेरे हाथ में!!!   जीतेगा तू, अपने दर्द के  पथर से न कुचल अपनों के जज्बातों को, बस बड़ा एक कदम, क्युकी  तेरी एक कोशिश में होगा  तुझे चाहने वालों का दम, तो बस उठ चल...  जीले ये पल... जीले ये पल... क्युकी... जीतेगा तू ...! 

तलाश...

तलाश बचपन में, एक उंगली की तलाश जवानी में, एक मार्गदर्शक की तलाश अँधेरे में, एक किरण की, तलाश ज़ेहन में, एक कल्पना की!! तलाश ज़िन्दगी में, एक अवसर की तलाश हाथों में, एक लकीर की तलाश करोड़ों में, एक अपने की तलाश गीत में, एक जीत की!! तलाश दुख में, एक मुस्कान की, तलाश ख़ुशी में, एक यार की, तलाश तूफ़ान में, एक सहारे की, तलाश रेगिस्तान में, एक बूंद की!!                                                                     तलाश समुद्र में, एक कश्ती की,                                  ...

उतना ही जिया...

तुझसे प्यार मैंने किया, तेरे साथ जितना जिया, उतना ही जिया, तू मेरे लबों की  मुस्कराहट बनी मेरे नैनो के आंसू, तू मेरी धकन भी बनी, तू मेरे बोल, मेरी जीत, तू मेरा गीत भी बनी तू ज़िन्दगी की वो खुबसूरत रहा बनी जिसपर चलना मेरी हरदम चाह थी!!! तेरे प्यार के सागर में ,मैं डूबा, तेरी बेरुखी को न समझा, जाकर दर पर की फ़रियाद ज़िन्दगी जीनी है सिर्फ तेरे साथ!!!   रब को था कुछ और ही मंजूर, टूटे मेरे ख्वाब, छुट्टा तेरा हाथ आज जी रहा हूँ, हर पल लेकर तेरी याद…!!!   भर जाए तेरा दामन इतनी खुशियों से, की, तेरे दिले में न रह जाये शिकायत, किसी के लिए रहेगी तू मेरे साथ सदा,  बनकर खुबसूरत एहसास, तुझसे प्यार मैंने किया, तेरे साथ जितना जिया, उतना ही जिया !!!

दिल में मोहब्बत...

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कितनी है इस दिल में मोहब्बत कहने के लिए लफ़्ज़ों की जरूरत नहीं, कितना है इन् आँखों में सम्मान दिखाने के लिए किसी बहाने की जरूरत नहीं, कितने है मन में जज़्बात उन्हें भाने के लिए आँसूं की जरूरत नहीं, कितनी है इन यादों में तकलीफ जताने के लिए बार बार कडवट बदलने की जरूरत नहीं, कितने हैं इस तनहा रात में वही हसीन ख्वाब, उनके साथ अब इन पलों को काटने की जरूरत नहीं, कितनी है इस दिल में मोहब्बत कहने के लिए लफ़्ज़ों की जरूरत नहीं...!!

बूँद...

तुम अनमोल हो,  तुम हार का वो मोती हो, जिसमे समाया है जीवन सारा,  जिससे है सागर,  हो डूबती ज़िन्दगी का किनारा!!!! खिलती कलि की खूबसूरती हो,  हर फूल की सुगंध, हवा में ताजगी का एहसास हो,  विशाल समुद्र की ताकत हो!!! आँखों से गिरती जज्बात,   पसीने में नज़र आती मेहनत, थकते, प्यासे राहगीरों की भुजाती प्यास हो, गगन से ज़मीन तक का सफार तय करती  नाजुबान के लिए ज़िन्दगी बनके बरसती हो!!! बिन तुम्हारे गोते लगाती मछली नहीं, मैं नहीं,  साहिल नहीं, दिन नहीं, शाम नहीं, किसी दिल में प्यार नहीं, राज नहीं,  बिन तुम्हारे ये हस्ती खेलती पृथ्वी नहीं!!! तुम कहने को मात्र पानी की एक बूंद हो लेकिन अनमोल हो,  महादेव की जटाओं में से निकलती पवित्रता हो….!...

Kitana hai kam...

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कितना है कम, जितना भी है उतना है कम, चिंता है सिर्फ इतनी, तिजोरी में एक इंच भी है क्यूँ खाली ठूस ठूस भर रहे हैं अपने बैंक लॉकर, कभी अपने बॉस के काटकर केक तो कभी जरूरतमंदों के साथ करके फरेब, इसके बाद भी जेब दिखाते हैं खाली किसको पता घर के कबाड़खाने में छिपी है सोने की थाली, भिखारी के कटोरे में २ का खनका कर, उठा लेते हैं १ का सिक्का  और मन में सोचते हुए चलते हैं, आज मैंने पुण्य का काम कर दिया, कितना है कम, जितना भी है उतना है कम...!

Zindagi hai kuch...

ज़िन्दगी है कुछ थमी थमी सी, सहमी सहमी सी, एक छोर पर खड़े हैं अपने, दुसरे छोर पर  हैं सपने!!! चलता हूँ उन सपनो की ओर तो, राहें दिखती हैं कुछ अनजानी अनजानी सी,  डरावनी डरावनी सी!!! हर मोड़ पर सामना होता है रहा गुज़र मुसाफिरों से कुछ के नाम याद रहजाते हैं और कुछ के लफ्ज़, जो बनजाते हैं मेरे समय के साथी!!! जब मंजिल दिखती है दूर, तब कुछ देर के लिए छाओं से भी हो जाती है यारी!!! सपने हैं कुछ उखड़े उखड़े  से, बिखरे बिखरे से, शायद इस्सलिये इस जंगल में अपने आपको अकेला पाता हूँ, ज़ंजीरो में जकड़ा सा महसूस पाता हूँ, इस में भी जब चुभन का एहसास नहीं होता तब ख़याल आता है, ज़िन्दगी है कुछ थमी थमी सी, सहमी सहमी सी…!!!

MuJhE PehaChaAnO...

क्या हूँ मैं, समुन्दर की वो बूंद, जिससे सागर बनता है , या जिसे लहरें अपने साथ लाती तो हैं लेकिन अकेला साहिल पर छोड़ लौट चलती हैं!!! क्या उडती वो पतंग हु, जो घमंड में  ये भूल जाती है की चंद लहमों के बाद, आना तो ज़मीन पर ही है!!! क्या हूँ मैं, किसी के दिल में बस्ती वो धड़कन, जो किसी के इशारों पर धडकना  बंद कर देती है, या गाड़ियों में पड़ने वाला वो तरल पर्दाथ, जो धुआं बनकर कुछ ही देर में इंसानों को छोड़, हवा के संग हो लेता है!!! क्या हूँ मैं, खुले आसमान में बिखरी चांदनी की वो चादर, जिसकी जान कुछ ही पलों में सूरज की किरने ले लेती है,  या अँधेरे में वो उजाला, जो समय गुजरने के साथ ही  कहीं धुन्दला पड़ने लगता है, क्या हूँ मैं कहीं मैं किसी और का आपके...