दिल में मोहब्बत...

कितनी है इस दिल में मोहब्बत
कहने के लिए लफ़्ज़ों की जरूरत नहीं,

कितना है इन् आँखों में सम्मान
दिखाने के लिए किसी बहाने की जरूरत नहीं,

कितने है मन में जज़्बात
उन्हें भाने के लिए आँसूं की जरूरत नहीं,

कितनी है इन यादों में तकलीफ
जताने के लिए बार बार कडवट बदलने की जरूरत नहीं,

कितने हैं इस तनहा रात में वही हसीन ख्वाब,
उनके साथ अब इन पलों को काटने की जरूरत नहीं,

कितनी है इस दिल में मोहब्बत
कहने के लिए लफ़्ज़ों की जरूरत नहीं...!!

टिप्पणियाँ