MuJhE PehaChaAnO...
क्या हूँ मैं,
समुन्दर की वो बूंद,
जिससे सागर बनता है ,
या जिसे लहरें अपने साथ लाती तो हैं
लेकिन अकेला साहिल पर छोड़ लौट चलती हैं!!!
लेकिन अकेला साहिल पर छोड़ लौट चलती हैं!!!
क्या उडती वो पतंग हु, जो घमंड में
ये भूल जाती है की चंद लहमों के बाद,
आना तो ज़मीन पर ही है!!!
क्या हूँ मैं,
किसी के दिल में बस्ती वो धड़कन,
जो किसी के इशारों पर धडकना
बंद कर देती है,
या गाड़ियों में पड़ने वाला
वो तरल पर्दाथ,
जो धुआं बनकर कुछ ही देर में
इंसानों को छोड़, हवा के संग हो
लेता है!!!
क्या हूँ मैं,
खुले आसमान में बिखरी
चांदनी की वो चादर, जिसकी जान कुछ ही पलों में
सूरज की किरने ले लेती है,
या अँधेरे में वो उजाला, जो समय गुजरने के साथ ही
कहीं धुन्दला पड़ने लगता है,
क्या हूँ मैं
कहीं मैं किसी और का आपके लिए
विश्वास तो नहीं…!!
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