बूँद...



तुम अनमोल हो, 
तुम हार का वो मोती हो,
जिसमे समाया है जीवन सारा, 
जिससे है सागर, 
हो डूबती ज़िन्दगी का किनारा!!!!

खिलती कलि की खूबसूरती हो, 
हर फूल की सुगंध,
हवा में ताजगी का एहसास हो, 
विशाल समुद्र की ताकत हो!!!

आँखों से गिरती जज्बात, 
पसीने में नज़र आती मेहनत,
थकते, प्यासे राहगीरों की भुजाती प्यास हो,
गगन से ज़मीन तक का सफार तय करती 
नाजुबान के लिए ज़िन्दगी बनके बरसती हो!!!

बिन तुम्हारे गोते लगाती मछली नहीं, मैं नहीं, साहिल नहीं,
दिन नहीं, शाम नहीं,
किसी दिल में प्यार नहीं, राज नहीं, 
बिन तुम्हारे ये हस्ती खेलती पृथ्वी नहीं!!!
तुम कहने को मात्र पानी की एक बूंद हो
लेकिन अनमोल हो, 
महादेव की जटाओं में से निकलती पवित्रता हो….!!!  

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