उतना ही जिया...



तुझसे प्यार मैंने किया,
तेरे साथ जितना जिया, उतना ही जिया,
तू मेरे लबों की  मुस्कराहट बनी
मेरे नैनो के आंसू, तू मेरी धकन भी बनी,
तू मेरे बोल, मेरी जीत, तू मेरा गीत भी बनी
तू ज़िन्दगी की वो खुबसूरत रहा बनी
जिसपर चलना मेरी हरदम चाह थी!!!

तेरे प्यार के सागर में ,मैं डूबा,
तेरी बेरुखी को न समझा,
जाकर दर पर की फ़रियाद
ज़िन्दगी जीनी है सिर्फ तेरे साथ!!!
 
रब को था कुछ और ही मंजूर,
टूटे मेरे ख्वाब, छुट्टा तेरा हाथ
आज जी रहा हूँ, हर पल लेकर तेरी याद…!!!
 
भर जाए तेरा दामन इतनी खुशियों से,
की, तेरे दिले में न रह जाये शिकायत, किसी के लिए
रहेगी तू मेरे साथ सदा, 
बनकर खुबसूरत एहसास,
तुझसे प्यार मैंने किया,
तेरे साथ जितना जिया, उतना ही जिया !!!

टिप्पणियाँ