Tera Mera Mann...



झिलमिलाते तारों की चादर के नीचे 
खोया है अपनी ही धुन में,
काले होते दिए में, सोचते सर खुजलाते 
एक बूंद में समाये पूरे संसार को समझने 
की कोशिश!!!


चार बाशिंदों में अंतर खोजने की चाह में,
आँखों में नींद का बेसब्री से इंतज़ार
कर रहे खुमार को,
पलकों को मीचते मसलते बड़ी मासूमियत 
से जाने के लिए कह रहा है!!!


अपनों का प्यार पाने की ख़ुशी और खोने 
का गम,क्यूँ होता है, जान्ने पहचान्ने में लगा है!!
लालच पर काबू क्यूँ नहीं, 
दिल में जज्ज्बात क्यूँ नहीं,
क्यूँ भूल जाता है कोई की उसकी असली 
मंजिल है कहाँ,
बिना एक कौड़ी लिए इस बूंद में से निकलकर
उसे भी जाना है वहां!!!


इतना सोचते, समझते जाने कब चाँद की चांदनी ने
करवट लेली, 
सूरज की किरणों ने अपनी जगमगाहट से तारों की 
झिलमिलाहट छुपाली…!!!

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Har Ghadi...

तलाश...

MaIn AdHuRa Hu....