छोटे बड़े पुल...

फासलों  को  कम  करते  हैं,  
ये  बनजाते  अन्जाने  में  ही महफूज़!!


धुप  में, आंधी में, वर्षा में, शीत में, 
तपते हैं, भीगते हैं, पर सीना तान खड़े रहते  
अपने हर मुसाफिर  को  उसकी  मंजिल  तक  पंहुचा  ते  हैं!!!


ये  छोटे बड़े पुल,
कहने को तो निर्जीव हैं लेकिन न जाने कितनो 
के खून-पसीने की बूंदों और दिन रात की मेहनत को 
अपने आगोश में लिए हुए है!!
कितनो की न जाने इसी पुल ने दो वक़्त की रोटी दाल
से भूख मिटाई है!!!


ये छोटे बड़े पुल
थके हारे राहगीरों को अपने आलिंगन में लेकर उन्हें एक 
नयी उर्जा और उत्साह के साथ रवाना करते हैं,
एक माँ का बेटा, 
बच्चों की मुस्कराहट “खिलोने”, 
पति का प्यार
कुछ ही पलों में अपनों तक पहुचाते हैं!!!


ये छोटे बड़े पुल  
हमारी उम्र दर उम्र, पीड़ियाँ दर पीड़ियाँ बिना किसी चाहत
के सेवा करते चलते हैं…
भार उठाये दिन रात चलते रहते हैं...!!

टिप्पणियाँ

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. Excellent thoughts! My views:
    यह सच है की यह छोटे बड़े पुल हम तक जीवन की छोटी बड़ी खुशियाँ पहुँचातें हैं!
    मगर आजकल के दौर में कई बेईमान इनसे मोटी कमाई कमाते है! आजकल पुल flyover, expressway के नाम से भी जाने जाते हैं, कई तो रातों रात खडें होतें हैं और सुबह तक ढेह जातें हैं!

    जवाब देंहटाएं

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