हिंदी हूँ मैं...
हिंदुस्तान में जन्मी,
दफ़न भी यहीं होती जा रही हूँ !
हर हिंदुस्तानी की आवाज़ बनी,
उसी आवाज़ से दूर होती जा रही हूँ !
दफ्फ्तर,स्कूल की पहचान बनी,
उन्ही में आज खुद को खोज रही हूँ !
मातृ भाषा होकर भी,
दफ़न भी यहीं होती जा रही हूँ !
हर हिंदुस्तानी की आवाज़ बनी,
उसी आवाज़ से दूर होती जा रही हूँ !
दफ्फ्तर,स्कूल की पहचान बनी,
उन्ही में आज खुद को खोज रही हूँ !
मातृ भाषा होकर भी,
अपने ही घर में पनाह मांग रही हूँ !
सिर्फ देश को मिली है आजादी,
मैं तो अभी भी अंग्रेंजी भाषा की गुलाम बनी हुई हूँ !
हिंदी हूँ मैं,
हिंदुस्तान में जन्मी,
दफ़न भी यहीं होती जा रही हूँ !
दफ़न भी यहीं होती जा रही हूँ !
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